• 12 Apr, 2026

यूनिसेफ इंडिया के अधिकारियों का इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भ्रमण

यूनिसेफ इंडिया के अधिकारियों का इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भ्रमण

भ्रमण के दौरान यूनिसेफ अधिकारियों ने संग्रहालय द्वारा भारत की सांस्कृतिक विविधता, जनजातीय जीवन शैली और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को संरक्षित एवं प्रदर्शित करने के प्रयासों की सराहना की।

भोपाल, / इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल में आज यूनिसेफ इंडिया एवं यूनिसेफ मध्यप्रदेश कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भ्रमण पर आया। इस प्रतिनिधिमंडल में श्री Paulos Workneh, Chief of WASH UNICEF India, श्री Anil Gulati, Chief UNICEF MP (a.i.), श्री Manish Wasuja, WASH Specialist, सुश्री Pratibha Singh, WASH Specialist UNICEF India, तथा श्री Narendra Singh Chouhan, WASH Officer शामिल रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने संग्रहालय परिसर के विभिन्न स्थलों का भ्रमण किया तथा यहाँ के प्रागैतिहासिक शैलाश्रयों (Rock Art Shelters) का विशेष रूप से अवलोकन किया। इन शैलाश्रयों में मौजूद हज़ारों वर्ष पुराने शैल चित्र मानव सभ्यता के विकास और उसके प्रारंभिक जीवन की झलक प्रस्तुत करते हैं। इस भ्रमण का आयोजन संग्रहालय के म्यूज़ियम कीपर डॉ. अशोक वर्धन और श्रीकांत गुप्ता द्वारा किया गया। उन्होंने अतिथियों को इन शैलाश्रयों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक महत्व की जानकारी दी और बताया कि यह स्थल प्रागैतिहासिक काल से लेकर आज तक मानव जीवन के विकास की निरंतर यात्रा का प्रतीक हैं।

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भ्रमण के दौरान यूनिसेफ अधिकारियों ने संग्रहालय द्वारा भारत की सांस्कृतिक विविधता, जनजातीय जीवन शैली और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को संरक्षित एवं प्रदर्शित करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत प्रतीक है बल्कि यह संस्थान समाज में शिक्षा, पर्यावरण और स्वच्छता जैसे मुद्दों पर जनजागरूकता लाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Paulos Workneh ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि जल, स्वच्छता और स्वच्छ व्यवहार (WASH – Water, Sanitation and Hygiene) के क्षेत्र में सामुदायिक सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक संस्थानों और संग्रहालयों के माध्यम से लोगों तक स्वच्छता, सुरक्षित जल प्रबंधन और स्वास्थ्य संबंधी संदेश प्रभावी ढंग से पहुँचाए जा सकते हैं।

Anil Gulati ने कहा कि मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में संग्रहालयों की भूमिका केवल धरोहर संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्थान सामाजिक मुद्दों पर संवाद और शिक्षा का केंद्र बन सकते हैं। उन्होंने संग्रहालय परिसर की प्राकृतिक सुंदरता और यहाँ प्रदर्शित जनजातीय जीवन की झलकियों की प्रशंसा की।

संग्रहालय के म्यूज़ियम कीपर डॉ. अशोक वर्धन ने बताया कि मानव संग्रहालय न केवल एक प्रदर्शनी स्थल है, बल्कि यह विभिन्न समुदायों और संस्कृतियों के बीच संवाद का माध्यम भी है। उन्होंने बताया कि संग्रहालय लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता है जो पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को प्रोत्साहित करते हैं।

भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने संग्रहालय के वीथि संकुल, गोतिया शैलाश्रय, और प्राकृतिक परिसर का अवलोकन किया। अतिथियों ने कहा कि इस स्थल का वातावरण भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना से जुड़ाव का अनुभव कराता है।

संग्रहालय के जन संपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने बताया यह भ्रमण न केवल सांस्कृतिक अनुभव का अवसर रहा बल्कि इससे यूनिसेफ और संग्रहालय के बीच भविष्य में कार्यक्रमों और जनजागरूकता अभियानों में सहयोग की संभावनाएँ भी उजागर हुईं।